Farmers Story Liladevi

भारत विशाल प्राकृतिक संसाधनों, विविध जलवायु, विविध कृषि परिदृश्य और अद्वितीय पारिस्थितिक और सांस्कृतिक विविधता से संपन्न देश है।  अभी भी देश की लगभग 55 प्रतिशत आबादी अपनी प्राथमिक आजीविका के लिए कृषि और कृषि संबद्ध क्षेत्रों पर निर्भर है।  देश की सामाजिक, प्राकृतिक और आर्थिक पूंजी के संयोजन के कारण, हम अब दुनिया के दूसरे सबसे बड़े खाद्य उत्पादक देश हैं।  भारत भूमि, प्रकाश, जल और श्रम से धन्य है।  मनुष्य के काम आने वाले अनाज, दालें, सब्जियाँ और फल तथा काली मिर्च और मसाले अपने आप उग आए हैं।  मानव सभ्यता के विकास के साथ ही मनुष्य ने इस उपयोगी पौधे की खेती शुरू की।  पौधों को मिट्टी से पर्याप्त प्राकृतिक पोषक तत्व मिलते हैं।  लेकिन ज्यादा फसल लेने के लिए ज्यादा पानी और खाद की जरूरत होती है।  पौधों का मुख्य पोषण नाइट्रोजन युक्त कार्बनिक पदार्थ है।  जानवरों का गोबर, मलमूत्र, मृत शरीर और सड़ते हुए पौधे मिट्टी के साथ मिल जाते हैं और समय के साथ प्राकृतिक खाद में बदल जाते हैं।  इस बात को समझते हुए राजस्थान राज्य के बाड़मेर जिले के मारुडी गांव की लीलादेवीजी ने एक बहुत ही सुंदर और छोटा बागबानी विकसित किया है।


परिचय:-


मैं पहले से ही खेती कर रही हूं।  मेरे पास पांच बीघा जमीन है जिसमें मैं वर्षा आधारित खेती करता थी।  जिसमें मैं बाजरा, मग और मठ लगाती हूं।  उसके बाद मेने छोटे स्तर पर वर्मी कम्पोस्ट बनाना शुरु किया।  मेरे पास तब दो खेलियां थी।  उसके बाद मैंने चार साल पहले बागवानी बनाई थी।  इसमें 26 बैर, 35 अनार, 5 सहजन, 25 गुंदा, 2 नींबू और 3 छायादार पेड़ लगाए हैं।  पानी के लिए अब मेरे पास एक बोरवेल है जो 325 फीट गहरा है।  मेरे यह पर जून और जुलाई के गर्मियों के महीनों में पानी खत्म हो जाता है।  फिर मैं बाहर से पानी के टैंकर मंगवाती हूं और बागबानी को पानी देती हूं।  मैं टपक सिंचाई से पूरे बगीचे को पानी देती हूं।  टपक सिंचाई सिस्टम मेरे बगीचे के सभी पेड़ों को कम पानी के साथ आवश्यकतानुसार पानी मिल जाता है। मेरी बागवानी मैं हर तीन दिन में पानी देती हूँ।



खाद:-


मेरे पास वर्तमान में 2 गाय, 10 बकरी, 09 बकरे और 06 बकरी के बच्चे हैं।  मैं अभी इसके गोबर और मिंगनी से वर्मीकम्पोस्ट खाद तैयार कर रही हूं।  जब मैं वर्मीकम्पोस्ट नहीं बना रही थी, तब मैं गाय के गोबर और बकरी की मिंगनी सहित कच्ची खाद को सीधे खेत में डालती थी।  वर्मी कम्पोस्ट की शुरुआत 4 साल पहले 2 बेड से की गई थी।  अभी मेरे पास वर्मीकम्पोस्ट की 12 खेली हैं। खेली की लंबाई 10x3x1 है। वर्मीकम्पोस्ट की खेली में जब खाद तैयार की जाती है तो एक खेली से 80 से 90 किग्रा वर्मीकम्पोस्ट निकलता है।  मेने बागवानी तैयार की बाद से वर्मीकम्पोस्ट और भेड़ की खाद दोनों डाल रही हूं। वर्मी कम्पोस्ट के सारी खेलिए बाड़मेर में कार्यरत संस्था Disha-RCDSSS ने दिए थे और उन्होंने वर्मी कम्पोस्ट बनानेकी तालीम भी रखवाए थी। वर्तमान में जीवामृत और कीड़ों के लिए अग्निअस्त्र भी बनाती हूं।


जीवामृत:-


 सामग्री:-


  •  पानी :- 180 लीटर

  •  गोबर :- 10 किग्रा

  •  गोमूत्र :- 10 लीटर

  •  बेसन :- 1 किग्रा

  •  गुड़ :- 1 किग्रा

  •  जैविक मिट्टी :- 250 मिली ग्राम



इन सभी सामग्रियों को 200 लीटर के ड्रम में मिलाकर घड़ी की सुई की दिशा मे हिलाएं।  इसी तरह रोजाना सुबह–शाम पांच मिनट तक घड़ी की सुई की दिशा मे हिलाएं। इस घोल को तैयार करने में गर्मी में चार से पांच दिन और सर्दियों में सात से आठ दिन का समय लगता है। मैं इस घोल को 200 लीटर प्रति एकड़ देती हूं।


अग्निअस्त्र:-


 सामग्री:-


  • गौमूत्र :- 20 लीटर

  • नीम के पत्ते :- 2 किग्रा 

  • अदरक :- 500 मिली ग्राम

  • मिर्च:- 500 मिली ग्राम

  • तम्बाकू :- 500 मिली ग्राम

  • लहसुन:- 250 मिली ग्राम



इन सभी चीजों को 20 लीटर गौमूत्र में मिलाकर गर्म करें।  इसे तब तक उबालें जब तक इसमें एक उबाल न आ जाए।  फिर इस घोल को रोजाना सुबह और शाम घड़ी की सुई की दिशा में हिलाएं।  इस घोल को दो दिन तक ठंडा होने दें।  मैं इस घोल को एक एकड़ में 200 लीटर पानी में 10 लीटर घोल मिलाकर फसलों पर छिड़कती हूं।


उत्पाद:-


वर्षा ऋतु में बाजरे की फसल से औसतन 1000 किलो बाजरा का उत्पादन प्राप्त होता है। हम मूंग और मठ भी लगाते हैं जिसमें से मूंग की दाल का औसत उत्पादन 70 किलो और मठ का 100 किलो उत्पादन होता है। इनमें से बाजरा घरेलू खपत के लिए उपयोगी होता है और मग और मठ बाजार में बिक्री के लिए जाते हैं। साथ ही अपनी बागवानी में मुझे बैर और अनार की उपज लेती हूं। मेरे एक बैर से 70 से 80 किलो उपज मिलती है।