B.R.C. - BIO-INPUT RESOURCE CENTRE - 5

10.बिज रक्षा:-

सामग्री:–
100 gm लाल मिट्टी 
100 gm पहाड़ की मिट्टी
20 gm हींग पाउडर
20 gm हल्दी पाउडर
10 ml गौमुत्र 

बनाने की पध्धति:-
जो सामग्री ली है वो सारी सामग्री को अच्छी तरह से मिक्स कर लेना है। बादमे इस द्रावण को दो घंटे तक ढकके रख देना है और इसको सूखने के लिए छोड़ देना है। ये पाउडर दो घंटे में तैयार हो जाता है। 

उपयोग करने की पद्धति:–
इस पाउडर का उपयोग 1 किलो बीज को पट देने के लिए 10 gm पाउडर का उपयोग करना है। इस पाउडर को पतली छाल के बीज को पट देने के लिए भी उपयोग किया जा सकता है।

बचत (सेल्फ लाइफ) :–
इस पाउडर को 6 महीने तक उपयोग कर सकते है।
इस पाउडर को सुखी जगह में(स्टोर) करके रखना है।

11.यहाँ के फार्मर ने बनाई हुई चीज (1):-

सामग्री:-
आंक:- 10 kg, 
खिप:- 10 kg, 
नीम:- 10 kg, 
तुम्बा:- 10 kg, 
गौमूत्र:- 10 L 

बनाने की पध्धति:-
इन सभी चीजो को गौमूत्र में 21 दिन रह ने दे| 

उपयोग करने की विधि:-
यह द्रवण को 21 दिन बाद छान कर 15 लीटर के पम्प में 400-450 ml डालकर फसल पर स्पे करे|

बचत(सेल्फ लाइफ):-
यह द्रवण को 6 माह तक बचत कर सकते है|

फायदे:-
यह द्रवण का स्प्रे करने से सभी प्रकार के किट का नियंत्रण कियाजा सकता है|


12. यहाँ के फार्मर ने बनाई हुई चीज (2):-

सामग्री:-
आंक:- 10 kg, 
हरी मिर्च:- 1 kg 
निम:- 10 kg, 
तुम्बा:- 10 kg, 
पानी:- 50 L

बनाने की पध्धति:-
इन सभी चीजो को गौमूत्र में 21 दिन रह ने दे| 

उपयोग करने की विधि:-
यह द्रवण को 21 दिन बाद छान कर 15 लीटर के पम्प में 400-450 ml डालकर फसल पर स्पे करे|

बचत(सेल्फ लाइफ):-
यह द्रवण को 6 माह तक बचत कर सकते है|

फायदे:-
यह द्रवण का स्प्रे करने से सभी प्रकार के किट का नियंत्रण कियाजा सकता है|

13. गाय का गोबर हींग का द्रावण:–
सामग्री:–
5 kg गोबर  
5 लीटर गौमूत्र
150 gm चुनो
200 gm हींग 

बनाने की पध्धति:-
सबसे पहले एक बर्तन में गौमूत्र और गोबर को अच्छे से मिक्स करके रख दीजिए। उसके बाद इस रावण को सुबह-शाम घड़ी की सुई की दिशा में भी लाना है और चार दिन तक इसको अंदर छोड़ देना है। चार दिन के बाद इस द्रावण में हींग और चुना यह दोनों को डाल कर अच्छे से मिक्स करके कपड़े से छान लेना है। यह द्रावण चार दिनों में तैयार हो जाता है।

उपयोग करने की विधि:-
सबसे पहले 200 लीटर का बैरल लेना है और उसमें 200 लीटर पानी भरना है। उसके बाद इस बैरल में 3 लीटर हमने जो द्रावण तैयार किया है वह डालेंगे। और हमें एक 1 एकड़ में इसका स्प्रे करके उपयोग करना है।

बचत(सेल्फ लाइफ):-
इस द्रावण का स्टोर नही कर सकते।
इस द्रावण को बनाने के बाद में तुरंत उपयोग कर लेना है।

फायदे:–
दुष्काल के समय में फसल को प्रतिरोधक शक्ति प्रदान करता है और अन्य फसल के ऊपर के पत्तो को गिरने से रोकता है।

14. प्याज का अर्क:-
सामग्री:-
 प्याज:- 5 kg
नारियल पानी:- 2 लीटर 
हल्दी पाउडर:- 100 gm 
गुड:-2 kg 
पानी:- 20 लीटर

बनाने की पद्धति:-
लीटर 20 लीटर पानी में प्याज की पेस्ट को 48 घंटे तक रखिए। उसके बाद उसको छान लीजिए। इसके बाद दूसरी चीजों को ऐड कर दीजिए। 

उपयोग करने की विधि:-
यह सब द्रावण को मिक्स होने के बाद 100 लीटर पानी में डालकर इसको फसल पर छिड़काव कर सकते हैं।

बचत(सेल्फ लाइफ):-
इस ग्राउंड की कोई बचत (सेल्फ लाइफ) नहीं है।

फायदे:-
सफेद, पीली मक्खी और लाल किटकों के असरकारक नियंत्रण के लिए इस द्रावण का उपयोग किया जाता है।

15. पंचगव्य:-
सामग्री:-
घी:- 1 kg 
दही:- 2 लीटर
दूध:- 3 लीटर
गोबर:- 7 kg (ताजा होना चाहिए)
गौ मूत्र:- 10 लीटर
नारियल पानी:- 3 लीटर
केला:- 12 पक्के केले
पानी:- 10 लीटर
गुड:- 3 kg 
पाम तेल:- 3 लीटर

बनाने की पद्धति:-
छोटे बर्तन में गोबर और घी को अच्छे से मिला लीजिए। और इसको 3 दिन तक सुबह शाम हिला लेना है। 3 दिन के बाद उनमें गोबर और पानी डाल कर उन्हे 15 दिनांक तक सुबह शाम हिलाना है। और 15 दिन बाद ऊपर ली गई सभी चीजें मिला लीजिए। यह सभी मिलाने के बाद 15 दिन तक सड़ने दे। यह होने के बाद पंचगव्य तैयार हो जाएगा।

उपयोग करने की विधि:-
यह द्रावण को 15 लीटर के पम्म में डालकर 500 ml छिड़काव कर सकते हैं।
यह द्रावण को 2.5 सरकारी बीघा में 20 लीटर पियत के साथ देना चाही ये।

बचत(सेल्फ लाइफ):-
पंचगव्य को 6 से 1 महीने तक बचत(स्टोर कर) सकते हैं।
पंचगव्य को प्लास्टिक के बर्तन में बचत(स्टोर) करें।

फायदे:-
पंचगव्य वह फल फूल और फसल की वृद्धि के लिए अच्छा होता है।