B.R.C. - BIO-INPUT RESOURCE CENTRE - 2
3.घन जीवामृत:-
घन जीवामृत तीन तरीके से बनाया जाता है|
1.सूखे गोबर से|
2.ताजा गोबर स|
3.गोबर गेस की स्लरी से|
1.सूखे गोबर का घन जीवामृत:-
सामग्री:-
100 kg सुखा हुआ गोबर(देशी गाय का)
1 kg गुड
1 kg बेसन
5 लीटर गौमूत्र
250 gm सजीव मिट्टी
बनाने की पद्धति:-
100 kg सूखे गोबर को पाउडर में बदल दीजिये| इसके बाद गौ मूत्र में गुड, बैसन और सजीव मिट्टी को गौमूत्र में अच्छे से घोल कर घोल बना लीजिए| वह घोल को धीरे-धीरे सूखे गोबर पर डालिए और मिक्स करते जाइए| सुखा गोबर को थोडा भिगो देना है इतना मिक्स करिए| इसके बाद छाव में सुखा लीजिये|
बनजाने का समय:-
सूखे गोबर आधारित घन जीवामृत 2-2.5 दिनमे बन कर तैयार हो जाता है|
बचत(स्टोर) करने की पध्धति:-
बचत(स्टोर) करने के लिए घन जीवामृत को बोरि(प्लास्टी की नहीं होनी चाहिए) में भरकर जमीन को ना छुए वैसी जगह रखिए। घन जीवामृत को 1 साल तक स्टोर किया जा सकता है।
उपयोग करने की पद्धति:-
1 एकड़ में 200 kg डाल सकते है। घन जीवामृत को यूरिया-डीएपी की तरह खेत में डालते है।
कब डालना चाहिए:-
घन जीवामृत को फसल बोने के समय और फूल अवस्था में डालना चाहिए।
सावधानी:-
छाव में रखिये| (सीधी धुप जीवामृत के ऊपर न गिरे)
बचत करने के समय घन जीवामृत सीधा जमीन कोना छूना नही चाहिए।
प्लास्टिक के बोरे में न रखे।
घन जीवामृत का फायदा:-
वर्षा ऋतु में सरल तासे उपयोग कर सकते है।
ज्यादा दिनों तक बचत कर सकते है।
जमीन में बेक्टेरिया की मात्रा में बढ़ावा करता है|
मित्र फूग के विकास में मदद करता है|
जमीन में केचुवे की संख्या को बढ़ता है|
उपयोगी वास्तु के फायदे:-
गोबर:- 1 gm गोबर में 300-500 करोड़ बेक्टेरिया होते हे और गोबर एंटी वायरस के गुण होते है|
गौ मूत्र:- गौ मूत्र एंटी फगल होता है|
बेसन:- बेक्टेरिया को प्रोटीन के रुपमे दिया जाता है| जिसे बेक्टेरिया अच्छी तरसे कार्य करे|
गुड:- बेक्टेरिया को ग्लूकोज मिलता है जिस्से बेक्टेरिया अपनी संख्या में बढावा कर सके|
मिट्टी:- इस क्षेत्र की मिट्टी के ph के अनुसार बेक्टेरिया का विकास हो सके|
जीवामृत में प्रत्येक 1 बेक्टेरिया प्रत्येक 20 मिनिट में दोगुने होते है|
2.ताजा गोबर का घन जीवामृत:-
सामग्री:-
100 kg तजा गोबर(देशी गाय का)
1 kg गुड
1 kg बेसन
250 gm सजीव मिट्टी
बनाने की पद्धति:-
100 kg गीले गोबर में गौमूत्र, गुड, बैसन और सजीव मिट्टी को गौमूत्र में अच्छे से घोल कर घोल बना लीजिए| वह घोल को धीरे-धीरे गिले गोबर पर डालिए और मिक्स करते जाइए| बाद में उसका ladu बना लीजिए। इसके बाद छाव में सुखा लीजिये|
बनजाने का समय:-
गिले गोबर आधारित घन जीवामृत का कोई निचित समय नही है। जब गोबर के ल्लाडू अच्छी तरह से सुख जाए तब खेत में डाल सकते है।
बचत(स्टोर) करने की पध्धति:-
बचत(स्टोर) करने के लिए घन जीवामृत को बोरि(प्लास्टी की नहीं होनी चाहिए) में भरकर जमीन को ना छुए वैसी जगह रखिए। घन जीवामृत को 1 साल तक स्टोर किया जा सकता है।
उपयोग करने की पद्धति:-
1 एकड़ में 200 kg डाल सकते है। घन जीवामृत को यूरिया-डीएपी की तरह खेत में डालते है।
कब डालना चाहिए:-
घन जीवामृत को फसल बोने के समय और फूल अवस्था में डालना चाहिए।
सावधानी:-
छाव में रखिये| (सीधी धुप जीवामृत के ऊपर न गिरे)
बचत करने के समय घन जीवामृत सीधा जमीन कोना छूना नही चाहिए।
प्लास्टिक के बोरे में न रखे।
घन जीवामृत का फायदा:-
वर्षा ऋतु में सरल तासे उपयोग कर सकते है।
ज्यादा दिनों तक बचत कर सकते है।
जमीन में बेक्टेरिया की मात्रा में बढ़ावा करता है|
मित्र फूग के विकास में मदद करता है|
जमीन में केचुवे की संख्या को बढ़ता है|
उपयोगी वास्तु के फायदे:-
गोबर:- 1 gm गोबर में 300-500 करोड़ बेक्टेरिया होते हे और गोबर एंटी वायरस के गुण होते है|
गौमूत्र:- गौ मूत्र एंटी फगल होता है|
बेसन:- बेक्टेरिया को प्रोटीन के रुपमे दिया जाता है| जिसे बेक्टेरिया अच्छी तरसे कार्य करे|
गुड:- बेक्टेरिया को ग्लूकोज मिलता है जिस्से बेक्टेरिया अपनी संख्या में बढावा कर सके|
मिट्टी:- इस क्षेत्र की मिट्टी के ph के अनुसार बेक्टेरिया का विकास हो सके|
जीवामृत में प्रत्येक 1 बेक्टेरिया प्रत्येक 20 मिनिट में दोगुने होते है|
3.गोबर की स्लरी का घन जीवामृत:-
सामग्री:-
गोबर की स्लरी का 100 kg पाउडर
1 kg गुड
1 kg बेसन
5 लीटर गौमूत्र
बनाने की पद्धति:–
गोबर गैस नी स्लरी ने सुकवी ने सूखे गोबर की तरह कर ना है। स्लरी 100 kg ना होतो सुख गोबर डालकर 100 kg कर लीजिए। इसके बाद गौ मूत्र में गुड, बैसन और सजीव मिट्टी को गौमूत्र में अच्छे से घोल कर घोल बना लीजिए| वह घोल को धीरे-धीरे सूखे गोबर पर डालिए और मिक्स करते जाइए| सुखा गोबर को थोडा भिगो देना है इतना मिक्स करिए| इसके बाद छाव में सुखा लीजिये|
बननेका समय:-
गोबर की स्लरी को सुखा नेके बाद 2-2.5 दिनका समय लगता है।
बचत(स्टोर) करने की पध्धति:-
बचत(स्टोर) करने के लिए घन जीवामृत को बोरि(प्लास्टी की नहीं होनी चाहिए) में भरकर जमीन को ना छुए वैसी जगह रखिए। घन जीवामृत को 1 साल तक स्टोर किया जा सकता है।
उपयोग करने की पद्धति:-
1 एकड़ में 200 kg डाल सकते है। घन जीवामृत को यूरिया-डीएपी की तरह खेत में डालते है।
कब डालना चाहिए:-
घन जीवामृत को फसल बोने के समय और फूल अवस्था में डालना चाहिए।
सावधानी:-
छाव में रखिये| (सीधी धुप जीवामृत के ऊपर न गिरे)
बचत करने के समय घन जीवामृत सीधा जमीन कोना छूना नही चाहिए।
प्लास्टिक के बोरे में न रखे।
घन जीवामृत का फायदा:-
वर्षा ऋतु में सरल तासे उपयोग कर सकते है।
ज्यादा दिनों तक बचत कर सकते है।
जमीन में बेक्टेरिया की मात्रा में बढ़ावा करता है|
मित्र फूग के विकास में मदद करता है|
जमीन में केचुवे की संख्या को बढ़ता है|
उपयोगी वास्तु के फायदे:-
गोबर:- 1 gm गोबर में 300-500 करोड़ बेक्टेरिया होते हे और गोबर एंटी वायरस के गुण होते है|
गौ मूत्र:- गौ मूत्र एंटी फगल होता है|
बेसन:- बेक्टेरिया को प्रोटीन के रुपमे दिया जाता है| जिसे बेक्टेरिया अच्छी तरसे कार्य करे|
गुड:- बेक्टेरिया को ग्लूकोज मिलता है जिस्से बेक्टेरिया अपनी संख्या में बढावा कर सके|
मिट्टी:- इस क्षेत्र की मिट्टी के ph के अनुसार बेक्टेरिया का विकास हो सके|
जीवामृत में प्रत्येक 1 बेक्टेरिया प्रत्येक 20 मिनिट में दोगुने होते है|