B.R.C. - BIO-INPUT RESOURCE CENTRE - 1

  1. जीवामृत :- 

सामग्री:-

  1. 200 लीटर बेरल (प्लास्टिक)

  2. 180 लीटर पानी

  3. 10 kg गोबर (स्वदेशी गाय का)

  4. 10 लीटर गौ मूत्र (स्वदेशी गाय का)

  5. 1 kg बैंसन

  6. 1 kg गुड

  7. 250 gm सजीव मिट्टी


बनाने की पध्धति:-

200 Liter के बेरल में 180 लीटर पानी लीजये| गुड और बेसन को थोड़े पानी में घोल दिजए| उसके बाद वह द्रवणको बेरल में डाल कर घड़ीकी सुई की दिशामे हिला दिजीए| गोबर को गौ मूत्र में डालकर पूरा घोल बनाकर बेरल में डाल दीजिये| सजीव मिट्टी को सीधा बेरल में डाल कर घड़ी की सुई की दिशा में हिला लीजिए| रोज सुबह और शाम 2 मिनिट घड़ी की दिशा में हीला लीजिये|


सावधानी:-

  1.  छाव में रखिये| (सीधी धुप जीवामृत के ऊपर न गिरे)

  2.  दूसरा पानी और कचरा मिल न जाए|

  3. बेरल को बोरी से ढके (बेर को हवा न जासके वेसे बांध नहीं करना|)


उपयोगी:-

  1.  1 एक इकडमें 200 लीटर जीवामृत पानी के साथ देना|

  2. पाक बुयके 21 दिन बाद देना|

  3. उसके बाद 15-15 दिन के अंतराल में देना है|


पहचान:- 

जीवामृत बनगया की पहचान बेरल में जीवामृत के ऊपर क्षारी(सफ़ेद परत) जमने लग जाए और मीठी सुगंध आने लग जाए| 


उपयोग और कितने दिन अच्छा रह सकता है:-

जीवामृत ठंड के मोसम में 7 दिनका समय लगता है और गरमी के मोसम में 4-5 दिनमे बनके तैयार हो जाता है|

बन्ने के बाद 3-4 दिनमे उसका प्रयोग करलेना चाहिए| जीवामृत 5 दिन अच्छा रह सकता है|


जीवामृत के फायदे:-

  1. जमीन में बेक्टेरिया की मात्रा में बढ़ावा करता है|

  2. मित्र फूग के विकास में मदद करता है|

  3. जमीन में केचुवे की संख्या को बढ़ता है|


उपयोगी वास्तु के फायदे:-

  1. गोबर:- 1 gm गोबर में 300-500 करोड़ बेक्टेरिया होते हे और गोबर एंटी वायरस के गुण होते है|

  2. गौ मूत्र:- गौ मूत्र एंटी फगल होता है| 

  3. बेसन:- बेक्टेरिया को प्रोटीन के रुपमे दिया जाता है| जिसे बेक्टेरिया अच्छी तरसे कार्य करे|

  4. गुड:- बेक्टेरिया को ग्लूकोज मिलता है जिस्से बेक्टेरिया अपनी संख्या में बढावा कर सके|

  5. मिट्टी:- इस क्षेत्र की मिट्टी के ph के अनुसार बेक्टेरिया का विकास हो सके|

जीवामृत में प्रत्येक 1 बेक्टेरिया प्रत्येक 20 मिनिट में दोगुने होते है|

2. बिजामृत:- 

सामग्री:-

  1. 5 kg गोबर(देशी गाय का)        

  2. 5 लीटर गौमूत्र(देशी गाय का)

  3. 50 gm चुना 

  4. 250 gm सजीव मिट्टी 

  5. 20 लीटर पानी 


बनाने की पध्धति:-

25 लीटर का बर्तन लीजिये| इसमें पहले 20 लीटर पानी डालिए| इसके बाद गोबर और गौमूत्र को पानी में डाल कर अच्छे से मिक्स कीजिये| इसके बाद बारी-बारी चुना और सजीव मिट्टी डालकर घड़ी की सुई की दिशा में हिला लीजिये|

  

बनजाने का समय:-

 बिजामृत 24 घंटे में बनकर तैयार हो जाता है|

 बिजामृत का पट्ट देने के बाद बिज को 


उपयोग करने की पध्धति :- 

बिजामृत को 3 पध्धति से उपयोग किया जाता है| 

  1. बिज के ऊपर बिजामृत का स्पे करे और हाथ से मिलाले|

  2. बिज के ऊपर सीधा बिजामृत डाले और हाथो से मिलाले|

  3. रोप की जड़ो को सीधा बिजामृत में डूबा कर सुखाले| 


कितने घंटे अच्छा रह सकता है:-

बिजामृत बन्ने के बाद 48 घंटे के लिये अच्छा रह सकता है|

बिजामृत का पट्ट देने के बाद बिज को 7 दिनमे उपयोग कर लेना चाहिए|