केन्सर की 2040 तक भारत पर असर


"इंडिया अगेंस्ट कैंसर" यानी कैंसर के खिलाफ भारत, नोएडा में नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ कैंसर प्रिवेंशन एंड रिसर्च की एक पहल है- के अनुसार, भारत...
भारत में कैंसर महामारी का रूप धारण करता जा रहा है। "इंडिया अगेंस्ट कैंसर" यानी कैंसर के खिलाफ भारत, नोएडा में नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ कैंसर प्रिवेंशन एंड रिसर्च की एक पहल है- के अनुसार, भारत में अभी 2.25 मिलियन लोग कैंसर से जूझ रहे हैं। अब जर्नल ऑफ ग्लोबल ऑन्कालजी में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया है कि भारत में कैंसर मरीजों का यह आंकड़ा 2040 तक दोगुना हो जाएगा।

रोगियों की संख्या बढ़ने का कारण 
भारत में लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियां जैसे डायबिटीज और कैंसर तेजी से फैल रही हैं। आज अकाल और शिशु मृत्यु दर की तुलना में इन बीमारियों से मरने वालों का आंक़ड़ा कहीं ज्यादा हो गया है। कैंसर की बीमारियों के बीच भी सबसे ज्यादा घातक होने की प्रतिस्पर्धा चल रही है। मसलन-लाइफस्टाइल से होने वाले कैंसर जैसे फेफड़ों के कैंसर से मरने वालों का आंकड़ा संक्रामक कैंसर जैसे सर्वाइकल कैंसर से ज्यादा हो गया है।  
चौंकाने वाले आंकड़े:
2018 में इंडिया स्टेट लेवल डिजीज बर्डन कैंसर (आई एस एल डी बी सी) ने कैंसर के आंकड़े जुटाए थे। देश में आबादी आधारित 42 कैंसर रजिस्ट्रियों से 28 प्रकार के कैंसर के आंकड़े सामने आए तो पता चला कि 2016 में भारत में हुई कुल मौतों का 8·3 फीसदी कैंसर के खाते में गई थीं।
आईएसएलडीबीसी ने पुरुषों और महिलाओं के लिए घातक साबित होने वाले पांच-पांच कैंसर का पता लगाया। पुरुष में जहां मुंह (ओरल), फेफड़े (लंग्स), पेट (स्टमक), कोलोरेक्टल, ओसाफगस कैंसर, तो महिलाओं में ब्रेस्ट, ओरल, सर्विक्स, लंग्स और गैस्ट्रिक कैंसर जानलेवा साबित हो रहे हैं। आई एस एल डी बी सी ने अपनी यह रिपोर्ट, ‘दी लान्सेट ऑन्कोलॉजी’ में प्रकाशित की है।
वहीं जर्नल ऑफ ग्लोबल ऑन्कालजी की स्टडी में भी बतााया गया है कि आने वाले वर्षों में हालात ज्यादा बिगड़ने वाले हैं। विडंबना यह भी है कि भारत में मरीज दिल से जुड़ी बीमारियों से (कार्डियोवेस्क्यूलर डिसीज) से तो बच जाएंगे, लेकिन कैंसर उन्हें मौत के मुंह में धकेल देगा।
...तो आगे क्या
आधुनिक समय में कैंसर सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। मेडिकल साइंस ने इसकी रोकथाम के लिए कई अध्ययन किए हैं। वैज्ञानिक यह पता लगाने में कायमाब रहे हैं कि कैंसर फैलता कैसे है। कुछ दवाओं और थैरेपी के रूप में कुछ सफलता भी मिली है। आने वाले सालों में इस रिसर्च के आधार पर इन्सानों पर दवाओं के ट्रायल होंगे और उम्मीद है कि कैंसर के कारणों और इसके इलाज तथा रोकथाम को लेकर बहुत कुछ पता चलेगा।
कैंसर एक जेनेटिक डिसऑर्डर है। यदि पहले परिवार में किसी को कैंसर हुआ है तो सदस्यों को समय-समय पर जांच करवाते रहना चाहिए। समय रहते कुछ अहम कदम भी उठाए जा सकते हैं। जैसा कि एंजेलिना जोली ने किया था। हॉलीवुड की इस मशहूर अदाकारा ने स्तन कैंसर का खतरा पैदा करने वाले बीआरसीए-1 जीन का पता चलने के बाद अपने दोनों स्तनों को मस्टेक्टॉमी सर्जरी के जरिये निकलवा दिया था।
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेसन के अनुसार, 30-50 फीसदी कैंसर की बीमारियों को रोका जा सकता है। कैंसर के सबसे बड़े खतरों, जैसे तंबाकू और UV rays से दूर रहें। एक अकेली सिगरेट में 7000 कैमिकल होते हैं, जिनमें से 50 कैंसर का कारण बनते हैं। तंबाकू आज ही छोड़ें। हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं। साथ ही ये कदम भी उठाएं